छठ पूजा 2026 में रविवार, 15 नवंबर को मनाई जाएगी। यह चार दिनों का पर्व है, जो कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी को खत्म होता है।
छठ पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इसे छठि या षष्ठी पूजा भी कहते हैं। परंपरा के अनुसार शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को होती है और समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| छठ पूजा 2026 की तारीख | रविवार, 15 नवंबर 2026 |
| पर्व की अवधि | चार दिन |
| शुरुआत | कार्तिक शुक्ल चतुर्थी |
| समाप्ति | कार्तिक शुक्ल सप्तमी |
| मुख्य पूजा | सूर्य और छठी मइया |
छठ पूजा 2026: चार दिन का शेड्यूल
छठ का व्रत चार दिनों तक चलता है। हर दिन की अपनी अलग रस्म होती है। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य किया जाता है।
- पहला दिन: नहाय-खाय
- दूसरा दिन: खरना
- तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
- चौथा दिन: उषा अर्घ्य
पहला दिन: नहाय-खाय की रस्म
नहाय-खाय के दिन व्रती स्नान करके घर और आसपास की सफाई करते हैं। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
दूसरा दिन: खरना का निर्जला उपवास
खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को गुड़ की खीर और रोटी ग्रहण करते हैं।
तीसरा दिन: डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य
संध्या अर्घ्य के दिन व्रती डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य और प्रसाद चढ़ाया जाता है।
चौथा दिन: उगते सूर्य को उषा अर्घ्य
उषा अर्घ्य के दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसी के साथ चार दिन का छठ पर्व पूरा होता है।
छठ पूजा में प्रसाद और खाने के नियम
छठ पर्व पर ठेकुआ, रसाबली, कसार लड्डू और चावल के लड्डू जैसे पारंपरिक प्रसाद बनाए जाते हैं। छठ का प्रसाद पूरी तरह शाकाहारी होता है और बिना प्याज-लहसुन के बनाया जाता है।
सूर्यदेव और छठी मइया की पूजा
छठ पूजा सूर्यदेव और छठी मइया को समर्पित है। छठी मइया को छठी माता भी कहा जाता है। परंपरा के अनुसार छठी मइया प्रकृति का छठा रूप और सूर्य की बहन मानी जाती हैं।
परंपरा के अनुसार सूर्यदेव और छठी मइया का संबंध भाई-बहन का माना जाता है। इस पर्व में स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से व्रत रखते हैं। मुख्य व्रती यानी परवैतिन आमतौर पर महिलाएं होती हैं, लेकिन पुरुष भी यह पर्व रखते हैं।
छठ पूजा की पौराणिक कथाएं और मान्यताएं
रामायण की परंपरा के अनुसार माता सीता ने दीपावली के छठे दिन छठ पूजा की थी। उस समय राम और सीता अयोध्या लौटे थे और रामराज्य की स्थापना हुई थी।
चंपारण (बिहार) और नेपाल के मधेश प्रांत में मान्यता है कि सीता नारायणी नदी के किनारे वाल्मीकि आश्रम में रहीं और वहीं छठ मनाया। मुंगेर में भी मान्यता है कि सीता ने छठ पर्व किया था। वहां गंगा में एक चट्टान पर सीताचरण मंदिर इस आस्था का मुख्य केंद्र है।
महाभारत की परंपरा के अनुसार कुंती ने लाक्षागृह से बचने के बाद छठ पूजा की थी। इसी पूजा के बाद कर्ण का जन्म हुआ था। मान्यता यह भी है कि द्रौपदी ने रांची के नगड़ी गांव में एक झरने के पास छठ पूजा की थी, जहां आज भी यह पर्व मनाया जाता है।
छठ व्रत की कथा के अनुसार जब पांडव जुए में राजपाट हार गए, तब श्री कृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा और उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में छठ पर्व के दौरान छठी मइया की पूजा का जिक्र है। इसी पुराण के अनुसार छठ पूजा की शुरुआत वाराणसी में गहड़वाल वंश ने की थी। काशी खंड कहता है कि यह चलन वाराणसी से अन्य जगहों तक फैला।
एक कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत की कोई संतान नहीं थी। कश्यप द्वारा यज्ञ कराने के बाद पुत्र पैदा हुआ, लेकिन मृत। तब देवी षष्ठी ने बच्चे को आशीर्वाद दिया और वह जीवित हो गया।
मान्यता है कि ऋषि कश्यप और अदिति का आश्रम बक्सर क्षेत्र में था। वहां अदिति ने कार्तिक माह के छठे दिन सूर्य को जन्म दिया था। इसलिए छठ पूजा सूर्य की जयंती के रूप में मनाई जाती है।
छठ पूजा का पारंपरिक लोकगीत
केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय
काँच ही बाँस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए
ये दोनों छठ पर्व के पारंपरिक लोकगीत हैं।
कहां-कहां मनाया जाता है छठ पर्व
छठ मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में मनाया जाता है। यह पर्व साल में दो बार आता है। चैत्र माह में चैती छठ और कार्तिक माह में कार्तिक छठ मनाई जाती है।
प्रवासी समुदाय दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जनकपुर और काठमांडू जैसे शहरों में छठ मनाते हैं। भारत और नेपाल के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, कनाडा, मॉरीशस, जापान और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में भी यह पर्व मनाया जाता है।
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में हाल के दशकों में छठ पूजा बड़े उत्साह से मनाई जाती रही है।
छठ व्रत की परंपरा और नियम
कुछ समुदायों में एक बार परिवार का कोई सदस्य छठ पूजा शुरू कर दे तो उसे हर साल करना जरूरी हो जाता है। यह परंपरा अगली पीढ़ी को सौंपी जाती है। उस साल परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए तो ही यह पर्व छोड़ा जाता है।
छठ पूजा से जुड़ी अन्य बातें
छठ पूजा के अनुष्ठानों में पवित्र स्नान, उपवास, पानी पीने से परहेज, पानी में खड़े रहना और सूर्य को अर्घ्य तथा प्रसाद अर्पित करना शामिल है। पर्यावरणविदों का दावा है कि छठ सबसे पर्यावरण-अनुकूल हिंदू त्योहार है।
महाराष्ट्र में शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं द्वारा कई बार छठ पूजा का विरोध किया गया है।
ये भी जानें
छठ पूजा 2026 में कब है?
छठ पूजा 2026 में रविवार, 15 नवंबर को मनाई जाएगी।
छठ पूजा कितने दिन चलती है?
छठ का व्रत चार दिनों तक चलता है।
छठ पूजा की शुरुआत और समाप्ति कब होती है?
परंपरा के अनुसार छठ पर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को शुरू होता है और कार्तिक शुक्ल सप्तमी को समाप्त होता है।
क्या छठ साल में दो बार मनाया जाता है?
हां, छठ चैत्र माह में चैती छठ और कार्तिक माह में कार्तिक छठ के रूप में दो बार मनाया जाता है।
छठ का प्रसाद कैसा होता है?
छठ का प्रसाद पूरी तरह शाकाहारी होता है और बिना प्याज-लहसुन के बनाया जाता है।

